गो रक्षा हमारी आत्मरक्षा का प्रश्न है

घास-फूस खाकर अमृतोपम दूध प्रदान करने वाली गाय की वास्तव में प्रभु की सृष्टि में अपनी उपमा है। गोदुग्ध सचमुच इस लोक का अमृत है। एक दूध से ही कितने पदार्थ तैयार किये जाते हैं। बैलों से खेती करने तथा बोझा ढोने का काम लिया जाता है। गोबर तथा गोमूत्र वैज्ञानिकों द्वारा सर्वोत्तम खाद घोषित किए जाते हैं। मरने पर गाय का चमड़ा तथा हड्डियाँ आदि भी मनुष्य जाति के लिए परमोपयोगी सिद्ध होते हैं। मनुष्य की मृत्यु के अनन्तर गाय उसको वैतरणी से पार कराती है या नहीं कराती इस विषय में हम अपनी अज्ञता स्वीकार करते हुए इतना कह सकते हैं कि मनुष्य को उसके जीवन में ही संसार-सागर को पार करने में जितना सहारा गाय से मिलता है उतना और किसी भी प्राणी से नहीं मिलता।

भारत वर्ष से विदेशियों की सत्ता को समाप्त करने के लिए जितने हिंसक-अहिंसक आन्दोलन आज तक चले, जितनी आजादी की लड़ाइयाँ लड़ी गई उन सब में गौ-रक्षा को पूरा-पूरा महत्व दिया गया। राजपूतों, मराठों, और सिखों ने गौरक्षा के लिए क्या नहीं किया।

महात्मा गाँधी, भगवान तिलक, महामना मदन-मोहन मालवीय आदि महापुरुषों ने गो-रक्षा को स्वतन्त्रता-आन्दोलन का एक अंग बनाए रखा। गाँधी जी ने अपने विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग ‘संघ’ बनाए तो गो-रक्षा के लिए गो-सेवा संघ भी स्थापित किया।

गाय हमारे राष्ट्र की रीढ़ है। भारत का आर्थिक ढाँचा गाय पर टिका हुआ है। गाय हमारे किसानों का सर्वस्व है। भारत के नेताओं, अर्थशास्त्रियों तथा पश्चिमीय विद्वानों ने भी आर्थिक दृष्टि से गाय को अत्यन्त महत्व दिया है। गाँधी जी ने लिखा है- “जब तक हम गाय को बचाने का उपाय ढूँढ़ नहीं निकालते तब तक स्वराज्य का अर्थ ही न कहा जावेगा। देश की सुख-समृद्धि गौरक्षा और उसकी सन्तान की समृद्धि के साथ जुड़ी हुई है।

गौ रक्षा एवं विकास के लिए तुरन्त उठाये जाने योग्य क़दम

  1. गौरक्षा एवं विकास विषय को समवर्ती सूची में लाकर केन्द्रीय कानून बनाकर गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाये तथा किसी भी आयु की गाय, साँड, बछिया अथवा बैल की हत्या मनुष्य की हत्या के बराबर दंडनीय अपराध घोषित किया जाये तथा गौमांस का निर्यात अविलम्ब बन्द किया जाये।
  2. गौरक्षा एवं हित के लिए बाकायदा केन्द्रीय मंत्रालय एवं मंत्री नियुक्त किया जाना चाहिए।
  3. प्रत्येक ग्राम व नगर के पाय पर्याप्त गोचर भूमि हो।
  4. सरकारी पशु चिकित्सालयों तथा गर्भादान केन्द्रों में विदेशी नस्ल के सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भादान अविलम्ब बन्द किया जाये।
  5. गौवंश से प्राप्त तमाम औषद्यीयों के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ साथ उसके करमुक्त भी किया जाये जिससे लोग गायों की सेवा कर उनसे अधिकाधिक औषद्यीयां बनाकर जनसेवा कर सकें क्योंकि गौमूत्रा समेत गाय के दूध एवं अन्य उत्पादों से कई असाध्य बीमारियों के शत प्रतिशत सही होने के कई प्रमाण सामने आ चुके हैं
  6. गौ को राष्ट्रमाता घोषित किया जाना चाहिए।
  7. गौरक्षा, संरक्षण पालन-पोषण की व्यवस्था को शैक्षणिक पाठयक्रम में शामिल किये जाने की भी सुविधा प्राप्त कराई जाये।
  8. गायों की व्यापक देखरेख करने के लिए चिकित्सालयों के अलावा भारत के प्रत्येक नगर में एक विभाग खोला जाये जिसमें अधिकारी टोल, सड़क अथवा अन्य स्थानों पर मिलने वाली लावारिस गौ को गौशालाओं में ले जाने की व्यवस्था कर सकें। जिनसे वह किसी गौहत्यारें के चंगुल में न पड़ें।

… यदि हम वेद पुराणों की बात को मानें तब भी कई बातें आज सच साबित हो रही हैं। अनेक पुराणों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि गौहत्या से वातावरण में तनाव पैदा होता है। सभी देवी-देवता, पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, अग्नि और परमात्मा का कोप मानव और पर्यावरण व वातावरण पर पड़ता है जिससे सूखा, बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायें आती हैं। अत: माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी से निवेदन है कि अब वे अपनी गौमाता की रक्षा और सेवा के लिए शीघ्रातिशीघ्र उपरोक्त बातों को संज्ञान में लेते हुए निश्चय ही ठोस कदम उठायेंगे। अब आपको तय करना है की गौ ह्त्या रोकने का बिल संसद मे कैसे पास करवाएँगे ??