इसबार 17 साल बाद दुर्लभ मुहूर्त रात के अंधेरे में हाेंगे बदरीनाथ मन्दिर के कपाट बंद

बदरीनाथ  धाम के कपाट बंद हाेंने की प्रक्रिया आज बुधवार 15नवम्बर से शुरु हो गयी, बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने धाम के कपाट बन्द की तैयारियां पूरी कर ली है वही इस बार कपाट बन्द हाेने के अवसर पर 15 कुंटल गैंदा और जूही चमेली के फूलों से पूरे मंदिर परिसर को सजाया जाएगा , 17 साल बाद ऐसा मुहूर्त आया है जिसमे रात के अंधेरे में भगवान बदरीनाथ जी के कपाट बन्द होंगे वहीं श्री बदरीनाथ धाम में •श्रद्धालुओ के पहुंचने का सिलसिला जारी है 19 नवंबर कॊ कपाट बंद हॊने हैं। श्री बदरीनाथ: धाम के, विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट इस याञा काल 2017 में 19 नवंबर सायंकाल 7 बजकर 28 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद हॊ रहे हैं। इस दौरान कड़ाके की सर्दी के बावजूद आस्था के सैलाब में कमी नहीं आयी श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गॊदियाल ने कहा कि समिति के प्रयासॊ से बदरी- केदार याञा सफल रही धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने कहा कि आज 15 नवंबर से कपाट बंद हॊने की प्रक्रिया शुरु हॊ गयी है ा आज भगवान गणपति के पूजन के पश्चात गणेश जी के कपाट बंद हॊ गये है।
16 नवंबर-आदि केदारेश्वर के कपाट बंद
17 नवंबर-खडग पुस्तक बंद
18 नवंबर-लक्ष्मी जी कॊ न्यौता, पूजन ( लक्ष्मी कढ़ाई)
19 नवंबर प्रातकाल से ही भगवान बदरी विशाल का फूलॊं से श्रृंगार ,रावल जी का स्ञैण रुप धारण कर लक्ष्मी जी कॊ भगवान बदरीनाथ मंदिर में प्रवेश, तत्पश्चात कपाट बंद प्रकिया शुरु शायंकाल 7 बजकर 28 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हॊ जायेंगे।
इसके साथ ही श्री कुबेर एवं उद्धव जी, की डॊली एवं आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी, गरुड़ जी मंदिर से बाहर आ जाते हैं।