आदि शंकराचार्य

‘आत्मा’ को पहचानने से ही कटेगा ‘मायाजाल’

निखिल दुनिया ब्यूरो। आचार्य शंकर ने अद्वैत वेदांत दर्शन द्वारा लोगों के बीच की खाई को पाटने का प्रयास करने का महत्वपूर्ण काम किया। शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन में ब्रह्म और जीवन को एक…

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आदि गुरु शंकराचार्य का देवप्रयाग से अनन्य सम्बन्ध

मोहनलाल बाबुलकर। आद्य गुरु शंकराचार्य की संपूर्ण यात्रा में उनके शिष्यगण भी साथ रहे। इन दक्षिणात्य ब्राह्मणों में गृहस्थ, संन्यासी व गृहत्यागी भी थे। सनातन धर्म के पुनर्द्धार हेतु आदि शंकराचार्य ने तीर्थों व धामों में…


ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या-आदि शंकराचार्य

निखिल दुनिया ब्यूरो। विश्व में जिन अद्वितीय भारतीय दार्शनिकों ने सनातन धर्म को पुनः प्रतिष्ठित किया उनमें आद्य शंकराचार्य निस्संदेह सर्वोपरि हैं। अपनी असाधारण बौद्धिकता से प्रकांड विद्वत समाज को हतप्रभ करने वाले इस युवा…


अहं ब्रह्मास्मि

निखिल दुनिया ब्यूरो। सात वर्ष की उम्र में ही शंकर वेद, वेदांत का पूर्ण अध्ययन कर घर वापस लौट आए थे। उनका मुख मण्डल ज्ञान से जगमगाने लगा था। निरंतर अद्वैत ब्रह्म का चिन्तन करते-करते…


आदि गुरु शंकराचार्य को कब समझेंगे हम

निखिल दुनिया ब्यूरो। यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।। अर्थात् भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि, हे भरतवंशी अर्जुन! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अपने आपको…