Home

शराब दस पीढ़ी को बर्बाद तो राम नाम इक्कीस पीढ़ियों को तारता है

उसी का जीवन सफल है जिसके जीवन में दृढ़ता है। उसी का जीवन सफल है जिसके जीवन में सत्संग के लिए स्नेह है। उसी का मनुष्य जन्म सफल है जिसके जीवन में सादगी, सच्चाई और…

Read More

No Picture

पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन 28 नवंबर से कालड़ी में

नई दिल्ली। देशभर में चार मठों और अद्वैत वेदांत द्वारा धर्म और दर्शन में आधुनिकता की नींव रखने वाले जगद्गुरु शंकराचार्य की जन्म स्थली कालड़ी गांव में इस साल 2018 का पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन आयोजित…


क्या आप जानते हैं मंदिर में घंटी लगाने के पीछे का साइंस कनेक्शन?

नई टिहरी। हिंदू धर्म में मंदिरों के बाहर घंटी और घड़ियाल लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है। हर भक्त मंदिर की घंटी बजाने के बाद ही मंदिर में भगवान के दर्शन करता है। ऐसी मान्यता…


मां कालिंका मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा संपन्न

नई टिहरी। क्षेत्र की सुख समृद्धि के लिए साबली (सौड़)  में नवनिर्मित मां कालिंका मंदिर में तीन दिवसीय मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने देवी के दर्शन कर…


नौछमी नारेणा के नायक दयालधर तिवाड़ी नहीं रहे

निखिल दुनिया ब्यूरो। नई टिहरी। सूपरहिट नौछमी नारेणा गीत में अपने अभिनय की प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले 72 वर्षीय चर्चित नायक दयालधर तिवाड़ी नहीं रहे। उन्होंने पल्या गों की सुरजा, माया लागी रे और…


व्हाट्‍सएप फॉरवर्ड मैसेज फीचर में जल्द मिलने वाली है यह सुविधा

मैसेजिंग एप व्हाट्‍सएप जल्द ही अपने ‘फॉरवर्ड मैसेज’ फीचर को अपडेट करने वाली है। इस अपडेट के बाद यूजर्स एक ही मैसेज को कई अलग-अलग ग्रुप में भेजेगा, तो आपको पता चल जाएगा कि यह…


मृत्यु कोई वस्तु नहीं है

(स्वामी विवेकानन्द) आत्मा तलवार की धार से कट नहीं सकती, आग से जल नहीं सकती, पानी में डूब नहीं सकती और वायु उसे सुखा नहीं सकती। प्रत्येक जीवात्मा एक गोलाकार के समान है जिसकी गोलाई…


ब्रह्म की सर्वव्यापकता

(योगिराज अरविन्द) ब्रह्म का न आदि है और न अन्त। वह अखण्ड है। उसके खण्ड-खण्ड नहीं किये जा सकते। इस पृथ्वी पर समस्त वस्तुओं की योजना इसी ब्रह्म से परिपूर्ण है। अनन्त ब्रह्माण्ड भी इसी…


अध्यात्म का मूल- अजपा जप

निखिल दुनिया ब्यूरो। ‘सोऽहम्’ का अर्थ है- ‘वह आत्मा – परमात्मा मैं हूँ । अपने में ईश्वरीय भाव की प्रतिष्ठा करने से आत्मा में परमात्मा की झाँकी होने लगती है और आत्म दर्शन का समाधि सुख प्राप्ति…


योग के बदलने लगे मायने

निखिल दुनिया ब्यूरो। हमारा पुरातन योग कुछ लोगों के कारण योग से योगा हो गया है। योग के शाब्दिक अर्थ पर जाएं तो सीधे-सीधे जोड़ को योग कहते हैं। इस संदर्भ में प्रश्न उठता है…