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मृत्यु कोई वस्तु नहीं है

(स्वामी विवेकानन्द) आत्मा तलवार की धार से कट नहीं सकती, आग से जल नहीं सकती, पानी में डूब नहीं सकती और वायु उसे सुखा नहीं सकती। प्रत्येक जीवात्मा एक गोलाकार के समान है जिसकी गोलाई…


ब्रह्म की सर्वव्यापकता

(योगिराज अरविन्द) ब्रह्म का न आदि है और न अन्त। वह अखण्ड है। उसके खण्ड-खण्ड नहीं किये जा सकते। इस पृथ्वी पर समस्त वस्तुओं की योजना इसी ब्रह्म से परिपूर्ण है। अनन्त ब्रह्माण्ड भी इसी…


अध्यात्म का मूल- अजपा जप

निखिल दुनिया ब्यूरो। ‘सोऽहम्’ का अर्थ है- ‘वह आत्मा – परमात्मा मैं हूँ । अपने में ईश्वरीय भाव की प्रतिष्ठा करने से आत्मा में परमात्मा की झाँकी होने लगती है और आत्म दर्शन का समाधि सुख प्राप्ति…


योग के बदलने लगे मायने

निखिल दुनिया ब्यूरो। हमारा पुरातन योग कुछ लोगों के कारण योग से योगा हो गया है। योग के शाब्दिक अर्थ पर जाएं तो सीधे-सीधे जोड़ को योग कहते हैं। इस संदर्भ में प्रश्न उठता है…


जानिए, क्यों कलियुग में रुद्र की उपासना है जरूरी?

निखिल दुनिया ब्यूरो। परब्रह्म परमात्मा निराकार निर्विकार निश्कल आदि है। वह वर्णन का विषय ही नहीं है पर जब वह त्रिगुणात्मिका प्रकृति से संपर्क करता है, सगुण रूप होता है तब वह वर्णन के क्षेत्र…


भद्रा के कारण दो घंटे ही रहेगा होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

निखिल दुनिया ब्यूरो। होलिका दहन के साथ ही होली का उत्सव शुरू हो गया। मगर इस साल होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा। इसलिए इस साल एक मार्च को दो घंटे ही होलिका दहन…


कांची पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती हुए ब्रह्मलीन, जानिए इस ताकतवर संत की कहानी

कांची कामकोटि मठ के 69 वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती बुधवार को ब्रह्मलीन  हो गए।  वे 82 साल के थे। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। तमिलनाडु स्थित हिंदू धर्म में सबसे अहम और ताकतवर…


भगवान विष्णु के अवतार ‘कल्कि’ का यहां होगा जन्म

निखिल दुनिया ब्यूरो। गीता में भगवान श्रीकृष्‍ण ने कहा है कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का बोलबाला होता है, तब-तब धर्म की स्‍थापना के लिए वह अवतार लेते हैं। भगवान का कल्कि…


‘कलि’ की उत्पत्ति किसने की? जानिए कलियुग का पूरा वंश . . .

एक बार नैमिषारण्य निवासी शौनकादि महाभागों ने सूतजी से भगवान विष्णु के कल्कि अवतार की कथा विस्तार पूर्वक जानने की इच्छा प्रकट की। सूतजी बोले-हे मुनीश्वरों! प्राचीन समय की बात है-इस परम अद्भुत उपाख्यान को…


परमयोगी संत ज्ञानेश्वर

निखिल दुनिया ब्यूरो। संत ज्ञानेश्वर तेरहवीं सदी के एक महान सन्त थे जिन्होंने ज्ञानेश्वरी की रचना की। संत ज्ञानेश्वर की गणना भारत के महान संतों एवं मराठी कवियों में होती है। ये संत नामदेव के समकालीन…