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जानिए, क्यों कलियुग में रुद्र की उपासना है जरूरी?

निखिल दुनिया ब्यूरो। परब्रह्म परमात्मा निराकार निर्विकार निश्कल आदि है। वह वर्णन का विषय ही नहीं है पर जब वह त्रिगुणात्मिका प्रकृति से संपर्क करता है, सगुण रूप होता है तब वह वर्णन के क्षेत्र…


भद्रा के कारण दो घंटे ही रहेगा होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

निखिल दुनिया ब्यूरो। होलिका दहन के साथ ही होली का उत्सव शुरू हो गया। मगर इस साल होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा। इसलिए इस साल एक मार्च को दो घंटे ही होलिका दहन…


कांची पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती हुए ब्रह्मलीन, जानिए इस ताकतवर संत की कहानी

कांची कामकोटि मठ के 69 वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती बुधवार को ब्रह्मलीन  हो गए।  वे 82 साल के थे। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। तमिलनाडु स्थित हिंदू धर्म में सबसे अहम और ताकतवर…


भगवान विष्णु के अवतार ‘कल्कि’ का यहां होगा जन्म

निखिल दुनिया ब्यूरो। गीता में भगवान श्रीकृष्‍ण ने कहा है कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का बोलबाला होता है, तब-तब धर्म की स्‍थापना के लिए वह अवतार लेते हैं। भगवान का कल्कि…


‘कलि’ की उत्पत्ति किसने की? जानिए कलियुग का पूरा वंश . . .

एक बार नैमिषारण्य निवासी शौनकादि महाभागों ने सूतजी से भगवान विष्णु के कल्कि अवतार की कथा विस्तार पूर्वक जानने की इच्छा प्रकट की। सूतजी बोले-हे मुनीश्वरों! प्राचीन समय की बात है-इस परम अद्भुत उपाख्यान को…


परमयोगी संत ज्ञानेश्वर

निखिल दुनिया ब्यूरो। संत ज्ञानेश्वर तेरहवीं सदी के एक महान सन्त थे जिन्होंने ज्ञानेश्वरी की रचना की। संत ज्ञानेश्वर की गणना भारत के महान संतों एवं मराठी कवियों में होती है। ये संत नामदेव के समकालीन…


आज का हिन्दू धर्म

निखिल दुनिया ब्यूरो। हिन्दू धर्म के दो रूप अनादि काल से चल रहे हैं। एक रूप सनातन है, नित्य है और दूसरा रूप विशेष है, परिवर्तनशील है। पहले रूप को सनातन धर्म कहा जाता है…


. . .जब श्राद्ध भोज में पहुंचे सैकड़ों कुकुर

निखिल दुनिया ब्यूरो। चरणदास बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। पश्चिम बंगाल के नवद्वीप में अपने आश्रम में रह कर वे साधना करते थे। उनके आश्रम में एक कुतिया रहती थी, जिसे बाबा प्रेम से ‘भक्ति मां’…


मन को स्वस्थ रूप से कार्यों में रत रखना आवश्यक

स्वामी बुधानंद। ‘खाली दिमाग शैतान का घर’ यह कहावत अत्यन्त सत्य है। अतः मन को स्वस्थ और सर्जनात्मक कार्यों में लगाकर रखना चाहिए। उसे उच्च विचारों और उदात्त अन्तः प्रेरणा की खुराक देनी चाहिए। अन्यथा…


हाथ मिलाना क्यों उचित नहीं?

भारतीय संस्कृति के अनुसार हाथ मिलाना उचित नहीं माना जाता। अभिवादन के लिए दूर से ही नमस्कार करने की परंपरा है। मिलते वक्त नमस्कार और विदा होते वक्त नमस्ते कहते हैं। हाथ मिलाने की बजाय…