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…तो स्वामी विशुद्धानंद सूक्ष्म शरीर से कर रहे ईश्वर आराधना

निखिल दुनिया ब्यूरो। चैरासी लाख योनियों में भटकने के बाद मिले इस मानव जीवन को हम दुनियादारी के काम-काज में यूं ही गंवा देते हैं। हजारों-लाखों में से कोई एक बिरला होता है, जो मानव…

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कण कण में है ईश्वर का वास

स्वामी शिवानन्दजी सरस्वती संसार में जो कुछ भी है सभी में ईश्वर का वास है, वह भले ही चर हो या अचर। ईश्वर का न कहीं अन्त है और न आदि। वह सर्वव्यापी, अन्तर्यामी, सर्वशक्तिमान…


उत्तराखंड में मौजूद है मां काली का ‘शक्तिपुंज’

मां भगवती का असीमित ‘शक्तिपुंज’ देवभूमि उत्तराखंड में ऊंचाई पर मौजूद है। कालीमठ मंदिर रुद्रप्रयाग में स्थित है। यहां से करीब आठ किमी. खड़ी चढ़ाई के बाद कालीशिला के दर्शन होते हैं। कालीमठ मंदिर रुद्रप्रयाग…


गौ रक्षा-कीजिए

(महात्मा गाँधी) मेरी दृष्टि में तो गौ-रक्षा मनुष्य-जाति के विकास में एक अद्भुत चमत्कारपूर्ण घटना है। यह मनुष्य-प्राणी को उसकी स्वाभाविक मर्यादा के ऊपर ले जाती है। मुझे तो गाय मानो मनुष्य-जाति से नीचे की…


लुँग-गोम-पा, सिद्धयोगी

प्रसिद्ध फ्रेंच परिव्राजक देवी श्रीमती अलेक्जेएंड्रा डैविड नील ने सिद्ध योगियों की बहुत खोज की है। वे ब्रसेल्स विश्वविद्यालय की प्रोफेसरी छोड़कर बौद्ध धर्म में दीक्षित हुईं और 12 वर्ष तक तिब्बत में रहकर लामा…


रामकृष्ण परमंहस के उपदेश

लुहार अपनी धोंकनी को निरंतर इसलिये धोंकता रहता है कि उसकी भट्टी की आग ठीक प्रकार जलती रहे। बुद्धिमान मनुष्य सत्पुरुषों के सत्संग इसलिए करता है कि उसका विवेक सदैव दीप्तिमान रहे। गिर्द्ध ऊँचे आकाश…


नासा ने लगायी हनुमान चालीसा की बात पर मुहर

जैसे-जैसे विज्ञान तरक्की करता जा रहा है, हिंदू धर्म ग्रंथों में लिखी गई कई बातें सही साबित होती जा रही हैं। ये प्रमाणित करता है कि भारतीय संस्कृति दुनिया को हजारों साल पहले ही ब्रह्मांड…


गोबर के सामने माॅडर्न साइंस के सूत्र टूटे

निखिल दुनिया ब्यूरो। धरती में सबसे मूल्यवान आॅक्सीजन है। मानव को एक सेकंड भी आॅक्सीजन न मिले तो इस शरीर का जिंदा रहना मुश्किल है। इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।…


संस्कार का जीवन में बहुत महत्व

हमारे जीवन में संस्कारों का अत्यधिक महत्व है। देवपूजन और देवदर्शन भारतीय संस्कृति के जीवंत संस्कारों के साथ ही श्रेष्ठ सदाचार भी हैं। सामान्यतः हमारा जन्म, हमारे कार्य, हमारा मन और हमारी वाणी के द्वारा…


गो रक्षा हमारी आत्मरक्षा का प्रश्न है

घास-फूस खाकर अमृतोपम दूध प्रदान करने वाली गाय की वास्तव में प्रभु की सृष्टि में अपनी उपमा है। गोदुग्ध सचमुच इस लोक का अमृत है। एक दूध से ही कितने पदार्थ तैयार किये जाते हैं।…