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ईश्वर नाम भव रोगों की औषधि

भारतीय जीवन पद्धति में आयुर्वेद केवल चिकित्सा की एक पद्धति नहीं, वरन् परिवार के एक आत्मीय सदस्य की तरह है। यह केवल रोगों की चिकित्सा तक ही सीमित नहीं है अपितु यह जीवन मूल्यों, स्वास्थ्य…

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क्या आप मनुष्य और देवताओं की समय गणना को जानते हैं?

सबसे अत्यंत सूक्ष्म काल परमाणु को कहते हैं। दो परमाणुओं का एक अणु और तीन अणुओं का एक त्रसरेणु होता है। झरोखे से आयी सूर्य-किरणों में त्रसरेणु उड़ते हुए दिखाई देते हैं। ऐसे तीन त्रसरेणुओं…


‘जैसा खाओ अन्न’ वैसा होवे मन

लोकोक्ति प्रचलित है कि ‘जैसा खाओ अन्न’ वैसा होवे मन। जैसा पीओ पानी, वैसी बोले वानी’। इस लोकोक्ति में दीर्घकालिक अनुभव सन्निहित है। इसका यह भी अर्थ होता है कि जिस भावना को लेकर कोई…


आत्मा क्या है?

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।। इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकता, अग्नि इसको जला नहीं सकती, जल इसको गीला नहीं कर सकता और वायु इसको सुखा नहीं…


क्यों धुंधकारी बन गया एक प्रेत?

श्रीमदभागवत कथा सुनकर धुंधकारी का हुआ उद्धार ऐसे सुनेंगे कथा तो स्वयं आएंगे भगवान प्राचीन समय की बात है। दक्षिण भारत में तुंगभद्रा नदी के किनारे एक नगर में आत्मदेव नाम का एक व्यक्ति रहता…


कभी सोचा है कि मानव रूप में धरती पर आए भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु कैसे हुई?

जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ा है, भगवान ने खुद यहां कई रूपों में अवतरित होकर दुनिया का उद्धार किया है। संसार के कल्याण के लिए उन्होंने तमाम लीलाएं रचीं और लोगों को जीवन का गूढ़…


भगवान कृष्ण: गोरक्षा क्रांति के प्रवर्तक

परात्पर परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं के माध्यम से गौओं के प्रति अपनी भक्ति को सिद्ध किया है। स्वयं श्रीकृष्ण ने यह प्रार्थना की है कि ‘गवां मध्ये वसाम्यहम’। वेद का वचन भी यही…


जीवन में मेहमान बन कर रहें

जवीन अस्थाई है। क्षणिक है हाथ में बंधी हुई घड़ी न सिर्फ समय बताती है बल्कि कट-कट की ध्वनि द्वारा संकेत करती है कि जवीन निरंतर कट रहा है, घट रहा है। आप जहां है…


एक संत का उपदेशामृत

धन, सम्पत्ति परिवार को छोड़कर वन में रहने की आवश्यकता नहीं है। आवश्यक है लोभ, मोह, मान, काम, क्रोध का त्याग और यह तभी होता है, जब साधक विनाशी के परे अविनाशी को जान लेता…


मृत्यु शोक का समय है या बोध का ?

किसी की मृत्यु होने पर हमें शोक होता है। पर क्या वास्तव मे मृत्यु शोक का समय है ? वास्तव में मृत्यु शोक का समय नहीं बल्कि विचार का समय है। इस सम्बन्ध में कृषगोतमी…