यह है घंटी बजाने का कारण

सनातन धर्म वैदिक काल से है। इस महान धर्म में हमारे ऋषि-मुनियों ने कुछ ऐसी परम्पराएं बनायी हैं, जो वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों नजरिए से शत प्रतिशत खरी उतरती हैं। सनातन धर्म के गूढ़ रहस्यों में छिपे हुए ज्ञान का पता जब व्यक्ति को पता चल जाता है तो उसकी आस्था और विश्वास और अधिक बढ़ जाता है।

हिंदू धर्म में देवालयों व मंदिर के बाहर घंटियां लगायी जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि जिस मंदिर में घंटी बजने की आवाज आती है, उसे जाग्रत देव मंदिर कहते हैं। उल्लेखनीय है कि सुबह-शाम मंदिरों में जब पूजा- आरती की जाती है तो छोटी घंटियों, घंटियों के अलावा घडियाल भी बजाए जाते हैं।

उन्हें विशेष ताल और गति से बजाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि घंटी बजाने से मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति भी चैतन्य हो जाती है। जिससे उनकी पूजा प्रभावशाली तथा शीघ्र फल देने वाली होती है। स्कंद पुराण के अनुसार मंदिर में घंटी बजाने से मानव के सौ जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं।

जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ तब जो नाद था, घंटी या घडियाल की ध्वनि से निकलता है। यही नाद औंकार के उच्चारण से भी जाग्रत होता है। घंटे को काल का प्रतीक भी माना गया है। धर्म शास्त्रियों के अनुसार जब प्रलय काल आएगा तब भी इसी प्रकार का नाद प्रकट होगा।

मंदिरों में घंटी लगाने का वैज्ञानिक कारण भी है। जब मंदिर में घंटी बजाई जाती है तो उससे वातावरण में कंपन उत्पन्न होता है जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाता है। इस कंपन की सीमा में आने वाले जीवाणु, विषाणु आदि सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। तथा मंदिर का तथा आस-पास का वातावरण भी शुद्ध बना रहता है।