अंग्रेज भारत में चाय लेकर क्यों आए?

राजीव दीक्षित। अंग्रेज जब भारत आए थे तो अपने साथ चाय का पौधा भी लाए थे। उन्होंने भारत के अधिक ठंड वाले जगहों की पहाड़ियों में चाय के पौधे लगाकर अपने बागान लगाए। 1750 से पहले भारत में चाय का नामोनिशान तक नहीं था। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने ही भारत में चाय का उत्पादन शुरू किया। पहला चाय का बागान भी ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा ही शुरू किया गया।

चाय के पौधे क्यों लगवाए
चाय एक दवा है, मगर सिर्फ उन लोगों के लिए जिनका ब्लड प्रेशर लो रहता है। जिनका ब्लड प्रेशर सामान्य और अधिक रहता है उनके लिए चाय जहर के समान है। अधिकांश अंग्रेजों का बीपी लो रहता है। क्योंकि अंग्रेज ठंडे इलाके में रहते हैं। अंग्रेज और उनके आस-पास के लोग जिन इलाकों में रहते हैं वहां साल के 6 से 8 महीने तो सूरज ही नहीं निकलता। इतना ही नहीं वहां तापमान षून्य से भी कई नीचे 20-30 डिग्री रहता है। 6 महीने धुंध ही धुंध रहती है।

ज्यादा ठंडे इलाके में जो रहेगा, उसका बीपी लो हो जाएगा। अंग्रेज बहुत ठंड में बर्फ में रहते है। जिस कारण उनका बीपी लो हो जाता है। एक दम बीपी बढ़ाने के लिए चाय सबसे अच्छी और काफी दूसरे नम्बर है काॅफी का सेवन। भारत में कुछ ठंडे इलाके में रहने वाले लोगों के लिए चाय, काॅफी का सेवन कर सकते हैं।

चाय पीने से हो सकती हैं ढेरों बीमारियां
हमारे देश में चाय पीना एक आदत है। बात के दौरान अगर चाय की चुस्कियां न ली जाएं तो कुछ अधूरा सा लगता है। देष की करीब 80 से 90 फीसदी जनसंख्या सुबह उठने के साथ ही चाय चाय पीना पसंद करती है। बेड टी का कल्चर न केवल शहरों में प्रचलित है बल्कि गांव-देहात में भी लोग सुबह की षुरूआत चाय से करना पसंद करते है।

सुबह उठकर ही हम जो फालतू का काम करते हैं वह है चाय पीना। कुछ लोगों को तो बेड टी चाहिए। चाय पीने से शरीर खराब होता हे। ज्यादा चाय पीने से नशा होता है। चाय की लत लग जाने पर एक दिन न चाय न पीने पर सिर का दर्द शुरू हो जाता है। तो ऐसा नशा किस काम हैं। चाय से पेट भी खराब होता है। चाय के अंदर कैफीन, निकोटीन, टेनिन 18-20 केमिकल होते हैं।

ऐसे केमिकल पेट के अंदर पहुंचकर एसिडिटी बढ़ाते हैं। पेट में पहले ही अम्लता बनती है और चाय पीने से अम्लता ज्यादा बनती है। पेट में अम्ल ज्यादा बनने पर तो वो खून में पहुच जाता है। खून की अम्लता बढ़ने पर शरीर में 80 रोग आ जाते हैं। जोड़ों का दर्द, हार्ट अटैक, घूटने दर्द, कंधा दर्द, सहित कई खराब रोग खून में अम्लता बढ़ने से होती है।

आदमी को छोड़कर कोई चाय नहीं पीता। कुत्ता, गाय, भैंसा कोई जानवर चाय नहीं पीता है। मानव हर घर में आने वाले का सत्कार चाय पीलाकर करता है। जिससे हम अपनी और दूसरों की आंते जलाते हैं, पेट जलाते हैं, पैसा बर्बाद करते हैं। स्वास्थ्य खराब होता है, भूख कम लगती है। इसे देखते हुए हमें चाय छोड़ देनी दीजिए। किसी भी महापुरुष से चाय नहीं पी। चाय बंद करो। चाय बंद करें तो दूध पीना चाहिए। दूध ज्यादा बिकने से पषुपालन को बढ़ावा मिलेगा।

चाय की तलब लगे तो उस समय पानी को खूब गर्म कीजिए। तुलसी की पत्ती, अदरक, गुड, दालचीनी डालकर खूब उबालकर पीजिए। नींबू निचोड़कर गुड़ डाल दीजिए। इसमें बहुत फायदा है। गर्म पानी पीने से चाय का जहर बाहर आ जाता है। शरीर शुद्ध हो जाता है। आज ही चाय छोड़ने का संकल्प लीजिए।