अंग्रेजी दवाइयों की गुलामी कब तक?

सच्चा स्वास्थ्य यदि दवाइयों से मिलता तो कोई भी डाॅक्टर, कैमिस्ट या उनके परिवार का कोई भी व्यक्ति कभी बीमार नहीं पड़ता। स्वास्थ्य खरीदने से मिलता तो संसार में कोई भी धनवान रोगी नहीं रहता। स्वास्थ्य इंजेक्शन, यंत्रों, चिकित्सालयों के विशाल भवनों और डाक्टरों की डिग्रियों से नहीं मिलता अपितु स्वास्थ्य के नियमों का पालन करने से संयमी जीवन जीने से मिलता है।

अषुद्ध और अखाद्य भोजन, अनियमित रहन-सहन, संकुचित विचार और छल-कपट से भरा व्यवहार-ये विविध रोगों के स्रोत हैं। कोई भी दवाई इन बीमारियों का स्थायी इलाज नहीं कर सकती है। थोड़े समय के लिए दवाई एक रोग को दबाकर कुछ ही समय में दूसरा रोग उभार देती है।

अतः अगर सर्वसाधारण जन इन दवाइयों की गुलामी से बचकर अपना आहार शुद्ध, रहन-सहन नियमित, विचार उदार तथा व्यवहार प्रेममय बनाये रखें तो वे सदा स्वस्थ, सुखी, संतुष्ट एवं प्रसन्न बने रहेंगे। आदर्श आहार-विहार और विचार-व्यवहार ये चहुंमुखी सुख-समृद्धि की कुंजियां हैं।

सर्दी-गर्मी सहन करने की षक्ति, काम एवं क्रोध को नियंत्रण में रखने की शक्ति, कठिन परिश्रम करने की योग्यता, स्फूर्ति, सहनषीलता, हंसमुखता, भूख बराबर लगना, शौच साफ आना और गहरी नींद-ये सच्चे स्वास्थ्य के प्रमुख लक्षण हैं।

डाॅक्टरी इलाज के जन्मदाता हेपोक्रेटस ने स्वस्थ्य जीवन के संबंध में एक सुंदर बात कही हैः

पेट नरम, पैर गरम, सिर को रखो ठण्डा।
घर में आये रोग तो, मारो उसको डण्डा।।