ज्योतिष के अनुसार पूर्व जन्म

भारतीय वाड्मय में प्राचीन काल से ही जन्म-जन्मांतर के फेरे यानी पूर्व जन्म, यह जन्म और अगले जन्म के सूत्र मिलते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी कोई जातक पैदा होता है, तो वह अपनी भक्ति और भोग्य दशाओं के साथ पूर्व जन्म के भी कुछ सूत्र लेकर आता है। पुनर्जन्म होता है या नहीं होता है? अगर यह होता है तो इसके प्रमाण क्या हैं?

मनुष्य के वर्तमान जीवन में जो कुछ भी अच्छा या बुरा अनायास घट रहा है, वह क्या पिछले जन्म का प्रारब्ध या भोग्य अंश है? दर्शनशास्त्र भी यही कहता है कि पिछले जन्म के अच्छे कर्म इस जन्म में सुख दे रहे हैं या पिछले जन्म के पाप इस जन्म में उदय हो रहे हैं।

हो सकता है इस जन्म में हम जो भी अच्छा या बुरा कर रहे हैं, उसका खामियाज या फल अगले जन्म में भोगेंगे या पाप के घड़े को तब तक संभाले रहेंगे जब तक वह फूटता नहीं है। हो सकता है  इस जन्म में किए गए अच्छे या बुरे कर्म अगले जन्म तक हमारा पीछा करें।

पुनर्जन्म की कई अवस्थाओं में व्यक्ति को अपने पूर्व जन्म की कई बातें याद रहती हैं। पिछले जन्म के संस्मरण और यादों को व्यक्त करने वाले कई उदाहरण हमारे सामने पत्र पत्रिकाओं में, टेलिविजन चैनलों में और अखबरों में आए दिन देखने को मिलते हैं। अगर उदाहरण दें तो आम आदमी ही नहीं दुनिया के खास आदमी भी अपनी पिछले जन्म की यादों को लेकर हमारे बीच में विराजमान है।

वेद-पुराणों के अनुसार मृत्युलोक अथवा पृथ्वी पर जन्म लेने वाले प्राणियों के शरीर नश्वर होते हैं लेकिन उनकी आत्माएं अमर मानी गई हैं। आत्मा केवल शरीर बदलती है और निश्चित समय के लिए उस शरीर में निवास करती है।

गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यही बताया है कि केवल आत्मा अमर है और शरीर नश्वर है। सभी व्यक्तियों का जीवन कैसा रहेगा यह उनके कर्म ही निर्धारित करते हैं। मृत्यु के बाद जीवित रहते किए कर्मों के आधार पर नया जीवन प्राप्त होता है।

ज्योतिष के अनुसार पूर्व जन्म में किए कर्मों के आधार पर जब ग्रह-नक्षत्रों के उचित स्थिति बनती है तभी इंसान को नया शरीर प्राप्त होता है अर्थात् नया जन्म मिलता है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति का गहराई से अध्ययन करने के बाद पिछले जन्म के संबंध में भी सभी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। पिछले जन्म में व्यक्ति की मृत्यु कैसे हुई? यह भी ग्रह-नक्षत्रों से मालुम हो जाता है।

परलोक और पुनर्जन्मांक के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु प्रथम भाव या सप्तम भाव में बैठा हो तो ऐसा समझना चाहिए कि उस व्यक्ति की पूर्व जन्म में मृत्यु स्वाभाविक नहीं थी। उसकी मृत्यु किसी दुर्घटना के कारण हुई होगी। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में एक साथ चार या इससे अधिक ग्रह नीच राशि के हों तो उस व्यक्ति ने पूर्व जन्म में निश्चय ही आत्म हत्या की होगी। ऐसा समझना चाहिए।