अर्थी बताती है जीवन का अर्थ

जीवन भर व्यक्ति परिवार के अनेक बोझ में ही उलझा रहता है। परिवार-बच्चों के पालन पोषण और सुख सुविधाएं जुटाने के लिए वह हर काम करने के लिए तैयार रहता है। यहां तक कि अपने निजी स्वार्थ के लिए व्यक्ति दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए भी तैयार रहता है। जबकि हर व्यक्ति के शरीर में आत्मा रूप में सा ईश्वर गलत तरीके से, दूसरों का अहित पहुंचाकर लाभ पाने के लिए मना करता है। लेकिन जब व्यक्ति आत्मा की बात नहीं सुनता है तो आत्मा मौन धारण कर लेती है। आत्मा को उस दिन का इंतजार रहता है जब व्यक्ति अर्थी पर पहुंचता है।

इस समय व्यक्ति को जीवन का अर्थ और आत्मा की कही बातें याद आती हैं। लेकिन इस समय पश्चाताप के अलावा कुछ और नहीं बचता है। तब तक शरीर मिट्टी में मिल चुका होता है। आपने मृत व्यक्ति को बांस की फट्टियों पर लेकर जाते हुए कभी न कभी जरूर देखा होगा। बांस की फट्टियों पर जिस पर शव को लिटाया जाता है, इसे अर्थी कहते हैं। अर्थी को उठाने के लिए चार कंधों की जरूरत पड़ती है।

जब व्यक्ति की अर्थी उठायी जाती है उस समय आत्मा मृत व्यक्ति से कहती है देखो, तुम्हारी यही औकात है। तुम्हें खुद सहारे की जरूरत है। तुम झूठा अहंकार करते रहे हो कि तुम लोगों को आश्रय दे रहे हो। जिन लोगों के लिए तुम दिन-राता धन जुटाने में लगे रहे। आज वही संगी साथी परिवार तुम्हें विराने में ले जाकर अग्नि में समर्पित कर देंगे।

जीवन का मात्र यही अर्थ है। इसलिए अर्थी को जीवन का अर्थ बताने वाला बताया गया है। अर्थी ले जाते समय लोग जोर-जोर से बोलते हैं राम नाम सत्य है, सब की यही गत्य है। नारे लगाने वाले लोग मृत व्यक्ति को ओर दुनिया को यह बताते हैं कि वास्तिवक सत्य राम का नाम है। अत में सभी की यही गति होनी है। इसलिए प्रभु का नाम भजते हुए ईमानदारी और सहृदयता के साथ जीवन जीना चाहिए।

जरूरतमंदों की सहायता से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। गीता में भगवान ने कहा है कि जो व्यक्ति जरूरत के समय व्यक्ति से नजर फेर लेता है वह नीच योनियों में जन्म लेता है। जरूरत के समय दूसरों की सहायता करने वाला व्यक्ति कई पापों से मुक्त हो जाता है। इसलिए व्यक्ति को परमार्थी होना चाहिए। मनुष्य का जन्म ही इस उद्देश्य के लिए हुआ है। जो व्यक्ति इस अर्थ को नहीं समझता उसे अर्थी पर जाकर ही जीवन का अर्थ ज्ञात होता है।