पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन 28 नवंबर से कालड़ी में

नई दिल्ली। देशभर में चार मठों और अद्वैत वेदांत द्वारा धर्म और दर्शन में आधुनिकता की नींव रखने वाले जगद्गुरु शंकराचार्य की जन्म स्थली कालड़ी गांव में इस साल 2018 का पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। काल भैरव अष्टमी के पर्व पर महासम्मेलन 28 नवंबर से 30 नवंबर तक चलेगा।

विश्वभर में जिन अद्वितीय भारतीय दार्शनिकों ने सनातन धर्म को पुनः प्रतिष्ठित किया, उनमें आद्य गुरू शंकराचार्य निस्संदेह सर्वोपरि हैं। आदि गुरु शंकराचार्य का जन्म केरल के कालड़ी गांव में हुआ था। उन्होंने मात्र बत्तीस वर्श के कुल जीवन में संपूर्ण भारत को अपने पैरों से नापकर देश को एक सूत्र में बांधने के लिए उत्तर में ज्योतिर्मठ, पूरब में गोवर्धनमठ, पश्चिम में शारदामठ और दक्षिण में श्रृंगेरीमठ की स्थापना की। आदि गुरु सही मायनों में भारतवर्ष के मानचित्र के पहले चितेरे थे। जिन्होंने पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक देश की सीमाओं का अंकन किया। वर्तमान भारत का जो नक्शा हम आज देखते हैं वस्ततुः उसका रेखांकन आद्य गुरू ने सदियों पूर्व कर दी थी। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ही षष्ठम् पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन को काल भैरव अष्टमी पर कालड़ी गांव में रखे जाने का निर्णय लिया गया है।


दिल्ली गुरुकुलम् के संचालक गव्यसिद्ध डाॅक्टर सोमपाल आर्य ने बताया कि पंचगव्य विद्यापीठम् के पंचगव्य गुरुकुलम् कांचीपुरम् समूह द्वारा हर साल काल भैरव अष्टमी पर अमर बलिदानी राजीव भाई दीक्षित के जन्म दिन पर देश के विभिन्न राज्यों में पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन का अयोजन किया जाता है। इस साल यह महासम्मेलन केरल के कालड़ी गांव में 28 नवंबर से होगा। इसमें सभी गव्यसिद्ध छात्र, गव्यसिद्ध डाॅक्टर, आचार्य एवं गुरुकुलम् विस्तार के संचालकों को आमंत्रित किया गया है। महासम्मेलन का शुभारंभ 28 नवंबर को सुबह 5 बजे से विशेष पंचमहाभूत पूजा के साथ शुरू होगा। खास बात यह है कि महासम्मेलन में गुरुदेव गव्यसिद्धाचार्य डाॅ निरंजन भाई वर्मा का विशेष उद्बोधन भी सबको सुनने को मिलेगा। महासम्मेलन में गव्यसिद्ध डाॅक्टरों का दीक्षांत समारोह भी होगा।

हर दिन होंगे सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम
28 नवंबर को स्थानीय लोक-कलाकार मोहिनीयत्तम नृत्य की प्रस्तुतियां देंगे। 29 नवंबर को कथकली नृत्य पर आधारित सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम होंगे। 30 नवंबर को समापन सत्र पर कलरी युद्ध कला का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही पद्मनाभम्, गुरुवायरप्पा आदि प्रमुख मंदिरों के दर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त हो सकेगा।