सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए जा रहे नेताजी, यह है महत्व

निखिल दुनिया ब्यूरो। गुजरात चुनाव के साथ ही इस बार सोमनाथ मंदिर भी काफी चर्चा में है। गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित सोमनाथ मंदिर का 12 ज्योतिर्लिंगों में काफी महत्व है। भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ पहले ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर को अतीत में 17 बार नष्ट करने का प्रयास किया गया। लेकिन इसका अस्तित्व आज भी है। मान्यता है कि मंदिर का निर्माण दक्ष प्रजापति के शाप से मुक्त होने के बाद स्वयं चंद्रदेव ने करवाया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।

इस वजह हुई सोमनाथ मंदिर की स्थापना
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सोम यानी चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति राजा की 27 कन्याओं से शादी की थी लेकिन वह रोहिणी नामक अपनी पत्नी से अधिक प्यार करते थे। शेष कन्याओं ने इसकी शिकायत अपने पिता दक्ष प्रजापति से की। अपनी कन्यायों पर अन्याय होता देख उन्होंने चंद्र देव को श्राप दे दिया कि हर रोज तुम्हारा तेज क्षीण होता जाएगा। शाप के दूसरे दिन से ही चंद्र का तेज घटने लगा। इससे विचलित होकर सोम ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी। उनकी आराधना से शिव प्रसन्न हुए और उनके श्राप का निवारण किया। सोम के कष्ट को दूर करने वाले शिव की स्थापना यहां होने से उनका नाम ‘सोमनाथ’ हुआ।

महाभारत काल से भी संबंध है सोमनाथ का
सोमनाथ मंदिर का संबंध महाभारत काल से भी बताया गया है। महाभारत युद्ध के बाद गांधारी ने युद्ध में यह समझा कि पांडव युद्ध कौशल में कौरवों से ज्यादा उत्तम नहीं थे। लेकिन उनकी जीत केवल भगवान श्रीकृष्ण के वजह से हुई। गांधारी ने कृष्ण को शाप देते हुए कहा कि जिस तरह कौरव वंश की महिलाएं विलाप में हैं, उसी तरह यदुवंश महिलाएं भी विलाप करेंगी।

श्रीकृष्ण ने त्यागा था देह
लोक मान्यताओं के अनुसार, यहीं पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने देह का त्याग किया था। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण भालुक तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे तभी एक शिकारी ने उनके पैरों को हिरण की आंख समझकर धोखे से तीर मार दिया। तभी श्रीकृष्ण ने देह त्याग दिया। यहां श्रीकृष्ण का एक बहुत बड़ा मंदिर भी है।

5 हजार सैनिकों ने किया हमला
अरबी यात्री अल-बरूनी ने अपनी यात्रा में सोमनाथ मंदिर का जिक्र अपनी यात्रा वृतांत में किया था, जिससे प्रभावित होकर महमूद गजनवी ने सन् 1024 में अपने 5000 सैनिकों के साथ मंदिर पर हमला कर दिया। सैनिकों ने मंदिर की संपत्ति को लूटा और उसे नष्ट कर दिया। गजनवी ने जिस वक्त मंदिर पर हमला किया, उस वक्त हजारों लोग पूजा कर रहे थे, उसने सभी का कत्ल कर दिया।

जुनैद ने किया मंदिर पर हमला
सबसे पहले एक मंदिर ईसा के पूर्व अस्तित्व में आया था, जिस जगह पर दूसरी बार मंदिर का पुनर्निर्माण सातवीं सदी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने किया। वहीं 8 वीं सदी में सिंध के अरबी गर्वनर जुनैद ने मंदिर को नष्ट करने के लिए अपनी सेना भेज दी। प्रतिहार राजा नागभट् ने 815 ई. में इसका तीसरी बार पुनर्निर्माण करवाया।

1706 ई में मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर को गिराया
सन् 1297 में दिल्ली के सल्तनत ने गुजरात में कब्जा करने के बाद मंदिर को पांचवी बार गिराया। इसके बाद गुजरात के राजभीम और मालवा के राजा ने फिर से इस मंदिर का निर्माण करवाया। सन् 1706 ई में मुगल बादशाही औरंगजेब ने इसे फिर गिरा दिया।

महमूद गजनवी ने किया शिवलिंग को खंडित
मंदिर को बार-बार गिराया गया और निर्माण कराया गया लेकिन 1026 में महमूद गजनवी ने शिवलिंग को खंडित कर दिया। इसके बाद शिवलिंग को प्रतिष्ठित किया गया और 1300 ई में अलाउद्दीन की सेना ने खंडित कर दिया।

सरदार पटेल ने बनवाया था मंदिर
अब जो मंदिर गुजरात में है, उसे सरदार पटेल ने खड़ा करवाया और  भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया।