भगवान श्रीराम की गो-सेवा

 

निखिल दुनिया ब्यूरो।
जब कभी गौ प्रेम की बात की जाती है तो सभी का ध्यान भगवान श्रीकृष्ण की ओर चला जाता है। श्रीकृष्ण गायों से अद्भुत प्रेम किया करते थे। इसी गोदुग्ध का पानकर ही भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य गीतारूपी अमृत संसार को दिया था।
मगर हम में से बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन भी गौ प्रेम और गौ सेवा का अनुपम उदाहरण रहा है। गोस्वामी तुलसीदास हमें बताते हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के इस धरती पर प्रकट होने का मुख्य कारण गोवंश हित भी था।

गोस्वामी कहते हैं, “विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार” अर्थात ब्राह्मण, तपस्वी, ज्ञानीजन, गौमाता, सज्जन, देवी-देवता, संत-साधु। प्रभु ने इन सबके हित के लिए ही मनुष्य रूप में अवतार लिया है।
कहा जाता है कि जिस प्रकार राजा दशरथ के महल में अनेकों बहुमूल्य पदार्थ थे, वहीं अमूल्य गायें भी थी। यह भी कहा जाता है कि भगवान श्रीराम अपने बाल्यकाल में बछड़ों के पीछे आंगन में सब ओर घूमते थे। यह देख कर राजा दशरथ और कौशल्या प्रसन्न होते थे।

महर्षि नारद एक प्रसंग में कहते हैं कि भगवान श्रीराम ने करोड़ों गायों का दान किया था। भगवान श्रीराम ने एक आदर्श व्यक्ति होने का एक अनुपम उदाहरण संसार के सम्मुख प्रकट किया है, और उनका अनुसरण करने की इच्छा रखने वालों के लिए गौ प्रेम और गोसेवा आवश्यक है। जब तक हमारे देश में गौ माता का आदर नहीं होगा तब तक राम राज्य एक कल्पना मात्र ही है।