वसंत पंचमी पर पांच घंटे रहेगा विशेष मुहूर्त

निखिल दुनिया ब्यूरो। इस साल 22 जनवरी सोमवार को वसंत पंचमी का महापर्व मनाया जाएगा। वसंत पंचमी पर सोमवार और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के संयोग के साथ ही लक्ष्मी एवं रवि योग का दिव्य मुहूर्त का संयोग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार सरस्वती पूजा का विशेष पूजा मुहूर्त 5 घंटे रहेगा।

वसंत पंचमी को विद्या और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर ज्ञान की देवी का आषीर्वाद पाने के लिए विद्यार्थी और बच्चे देवी सरस्वती की विषेश पूजा-अर्चना करते हैं। इतना ही नहीं संगीत के क्षेत्र से जुड़े लोग भी इस दिन देवी की आराधना करते हैं।

इस बार वसंत पंचमी की तिथि 21 जनवरी रविवार को सायं साढ़े तीन बजे से प्रारंभ होगी। इसके बाद पंचमी 22 जनवरी सोमवार को 4 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। इस साल बसंत पंचमी सोमवार के दिन उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के योग में आ रही है। ठीक ऐसा ही संयोग 14 सालों पूर्व भी बसंत पंचमी के दिन बना था। इसके साथ ही इस साल वसंत पंचमी पर लक्ष्मी और रवि योग भी बन रहे हैं।

सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह साढ़े सात बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार शुभ मुहूर्त में की गयी पूजा-आराधना का कई गुना अधिक फल मिलता है।

इस दिन से वसंत के साथ ही फूल खिलने लगते हैं। यह नयी ऋतु के आगमन का दिन भी माना जाता है। भारतीय पंचांग में 6 ऋतुएं हैं, इनमें से वसंत ऋतुओं का राजा भी माना जाता है। वसंत ऋतु का आगमन पतझड़ के बाद होता है। वहीं वसंत ऋतु का आगमन नई फसल के उगने और फूलों के खिलने का त्योहार भी कहा जाता है। इस खुशी में देशभर में उत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि वंसत पचंमी से ठंड कम हो जाती है और दिन तेजी से बड़े होने लगते हैं।

मां सरस्वती की पूजा से होते हैं ये लाभ
मान्यता है कि जिन लोगों में एकाग्रता की कमी हो उन्हें मां सरस्वती की पूजा जरूर करनी चाहिए. ऐसे लोगों को रोजाना एक बार सरस्वती वंदना का पाठ जरूर करना चाहिए. सरस्वती वंदना का पाठ करने से एकाग्रता की कमी की समस्या दूर हो जाती है. पूजा के दौरान मां सरस्वती पेन अर्पित करके उसे पूरा साल यूज करना चाहिए. ऐसा कहा जाता है कि इस पेन में माता सरस्वती का वास होता है जो सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती है. लेखन के क्षेत्र में करियर बनाने वाले लोगों के लिए कहा जाता है कि उन्हें लिखने से पहले “ऐं” जरूर लिखना चाहिए.

  • वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करते वक्त पीले या फिर सफेद कपड़े पहनने चाहिए.
  • ध्यान रहे कि काले और लाल कपड़े पहनकर मां सरस्वती की पूजा ना करें.
  • वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके करनी चाहिए.
  • मान्यता है कि मां सरस्वती को श्वेत चंदन और पीले फूल बेहद पंसद है इसलिए उनकी पूजा के वक्त इन्हीं का इस्तेमाल करें.
  • पूजा के दौरान प्रसाद में दही, लावा, मीठी खीर अर्पित करनी चाहिए.
  • पूजा के दौरान माँ सरस्वती के मूल मंत्र “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का जाप करें.

इनका क्या है कहना-
बसंत पंचमी सोमवार और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के साथ रवि योग के साथ आ रही है। माता सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त साढ़े सात बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक रहेगा। इस काल में की गयी पूजा का कई गुना अधिक फल मिलता है-पं उदय शंकर भट्ट, पूर्व अध्यक्ष उत्तराखण्ड विद्वत सभा